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असम सरकार की आईटी
नीति
परिचय:
हमारे अधुनिक युग में सुचना प्रौद्योगिकी (आईटी) ने एक महत्वपुर्ण
स्थान प्राप्त किया है और विश्व अर्थ-व्यवस्था में अत्यंत तेजी से
बढ़नेवाले क्षेत्रों में से एक है । आईटी की अवश्यकताओं ने जीवन के हर
पहलू पर व्याप्त होकर विस्तृत हो गया । असम सरकार ने इस सत्य को पहचाना
और आईटी के सभी पक्षों को ध्यान में रखकर निम्न नीति का प्रतिपादन किया
।
नीति की लाक्षणिकताएँ:
असम की सूचना प्रौद्योगिकी नीति की अधारभूत लाक्षणिकताएँ होनी चाहिए
...
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राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास के उद्देश्य की
पूर्ति के लिए आईटी उद्योह उन्नति का प्रमुख संगत बैठाना ।
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राज्य के नागरिकों को बेहतर सेवाएँ उपलब्ध करवाने के दृष्टिकोण के साथ
सरकारी स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग की गति को बढ़ाना ।
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राज्य के नागरिकों को सरकारी की बहतरीन उत्पादक और दक्ष सेवाएँ ।
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राज्य में शिक्षित नियुक्ति के एक बहुत बड़े भाग की खपत के साथ ही
नियुक्तिकारी महत्वपूर्ण साधन की दिशा में उन्नति करना ।
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सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में राज्य को एक प्रतिष्टित स्थान पर
पहुँचाने में समर्थन ।
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राज्य में घरेलु तथा निर्यातोन्मुखी दोनों आईटी इकाइयों को प्रोत्साहित
करना एवं विकास की गति को बढ़ाना और भारत के अंदर तथा विदेशों में आईटी
निवेश के लिए राज्य को एक आकर्षक लक्ष्य बनाना ।
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राज्य में स्कूलों, कॉलेजों, तथा शैक्षणिक संस्थानों में सूचना
प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए क्षेत्र में युवाओं
को आवश्यक कौशल तथा जनकारी प्रदान कर उन्हें अति नियोजनकारी बनाना ।
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स्थाई प्रणाली के अंतर्गत निजी क्षेत्र में कुशल श्रम-शक्ति के निर्माण
के उद्देश्य से प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना ।
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असम की सूचना प्रौद्योगिकी नीति का कंप्यूटर अनुप्रयोगों के क्षेत्र
में सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के लिए श्र-शक्ति विकास प्रशिक्षण का गठन
।
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सटीक रुपांकित आँकड़ा संचय प्रबंध पद्धति के द्वारा विभिन्न विभागों और
अलग देशीकता से बिखरे हुए प्रशासनिक समष्टियों के बीच उपयुक्त नेट्वर्कों
का विकास ।
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निजी क्षेत्र में आईटी के प्रसार को प्रोत्साहन ।
नीति के महत्वपूर्ण लक्षण:
असम की सूचना प्रौद्योगिकी नीति की महत्वपूर्ण लाक्षणिकता होनी चाहिए
....
3.1 सरकारी प्रशासन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नीति:
3.1.1. आईटी नीति के क्रियान्वयन के लिए उद्योग एवं वाणिज्य विभाग,
गुंछित विभाग के समान कार्य करेगा, जो असम सरकार के अन्य सभी विभागों
के साथ समन्वयन करके आईटी नीति के विस्तृत लक्षणों एवं उद्देश्यों को
प्राप्त करने के लिए स्थिर होगा ।
3.1.2. सरकार को 2004 तक इसके सभी कार्यालयों के बीच संयोजन का प्रयास
करना चाहिए । ताकि उत्पादकता को बढ़ाने के लिए ई-मेल / वीडियो स्म्मेलन
इत्यादि के द्वारा संदेश प्रवाहित हो सके । राज्य सचिवालय के साथ
संपूर्ण जिला हेड-क्वाटारों के बीच बातचीत को संभाव बनाने के लिए सरकार
को वीडियो-सम्मेलन तथा ई-मेल सुविधाओं को उपलब्ध करवाने का प्रयास करना
चाहिए ।
3.1.3. सरकार को शासन की पद्धति में सुधार के लिए प्रयास करना चाहिए,
जिससे कि नागरिक सरकार द्वारा माँगे गए उनके दस्तावेजों को
इलेक्ट्रॉनिक के द्वारा दाखिल कर सके । राज्य में वेब अनुप्रयोगों को
स्थानीय भाषा में विकसित करना होगा ।
3.1.4. उत्पादकता को बढ़ाने के लिए संपूर्ण सरकारी कर्मचारियों को सूचना
प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर सकने योग्य बनाने के लिए सरकार को
स्थान-स्थान पर प्रशिक्षण कार्यक्रम रखने का प्रयास करना होगा ।
3.1.5. सरकर को एक विशेष बजट अभिभाषण तैयार करना होगा, जो प्रत्येक
विभाग में इसके कंप्यूटरकृत कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए प्रतिवर्ष
योजना राशि का कम-से-कम 2-3% सरकारी विभागों के लिए नीयत करता हो ।
3.1.6. कार्य की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकार को अवसंरचना में
सुधार जैसे विभागों के अंर्तसंयोजन के लिए संदेश केबल बिछाने, आँकड़ा
स्थानांतरण कार्यालयों, राउटर इत्यादि की स्थापना, तथा विश्वसनीय उर्जा
पूर्ति, परिवहन-तंत्र आदि को सुरक्षित करना होगा ।
3.1.7. सरकार को संपूर्ण शैक्षणिक संस्थानों में सूचना प्रौद्योगिकी के
उपयोग को प्रतिवर्ष विशेष अनुदान देकर प्रोत्साहित करना चाहिए, जिससे
उनके लिए आवश्यक अवसंरचना प्रस्तुत की जा सके । विभिन्न शैक्षणिक
संस्थानों के बीच भी 2004 तक अंर्तसंबंध स्थापित करना होगा ।
3.1.8. सरकार को उद्योग की सहयता से शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण
कार्यक्रमों का आरंभ करना होगा, जिससे पाठन-प्रक्रिया में उन्हें सूचना
प्रौद्योगिकी के उपयोग से सहायता मिले ।
3.1.9. सरकार को स्कूली बच्चों को कंप्यूटर की उपयोगिता के बारे में
पढ़ाने का और कंप्यूटर द्वारा प्रशिक्षण प्रदान करने का प्रयास करना होगा
। असम राज्य के सभी कॉलेजों के विद्यार्थियों को सूचना प्रौद्योगिकी के
प्रयोग द्वारा 3 महीने का कोर्स करने के लिए तथा 2004 तक कंप्यूटारों
पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ।
3.2 सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के निर्यात तथा घरेलू बाज़ार दोनों की
आवश्य्कताओं की आपूर्ति करने के लिए सरकार को अधिक से अधिक संख्या में
कॉलेजों के बिद्यार्थियों को सूचना प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञ बनाने के
लिए कंप्यूटर शिक्षा में विशिष्टिकरण के पाठ्यक्रम को मानक और मान्यता
प्राप्त होना होगा । शिक्षा विभाग को चेष्टा स्वरुप नियोजनों पर निगरानी
रखनी होगी और कार्यो की आवश्यकताओं के अनुसार आचरणों की रुपरेखा में
उपयुक्त बदलाव लाना होगा ।
3.2.1. सरकार को चाहिए कि असम इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम लि. (एईडीसी
लि.) को सशक्त बनाए । एईडीसी अपनी आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न सरकारी
विभागों में उपयुक्त हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के
चयन में सहायक होगा और सुगमता की भूमिका निभाएगा ।
3.2.2. सरकार को कंप्यूटर और संचार प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों
में विशेष प्रशिक्षण के लिए राज्य में या बाहर स्थित विभिन्न सरकारी
विभागों, उपक्रमों, स्वायत्त संस्थानों और अन्य ग़ैरसरकारी संस्थाओं या
संस्थानों के कर्मचारियों को ज़ामिनदार निरुपित करना होगा । निजी
क्षेत्र तथा संघ सरकार के सहयोग के साथ गुवाहाटी में एक स्वायत्त
आईआईआईटी की स्थापना करने पर पूरा बल देना होगा ।
3.3. उद्योग के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नीति:
3.3.1. पहले चरण में विस्तृत अवसंरचना सुविधाओं के साथ, पर्याप्त ऊर्जा,
पानी और दूरसंचार सुविधाओं सहित सरकार को गुवाहाटी में एक सॉफ्टवेयर
प्रौद्योगिकी पार्क (एसटीपी) की स्थापना करनी चाहिए । एसटीपी इकाइयों
में कार्यरत व्यवसायियों के सुगम आवागमन के लिए एसटीपी में और इसके
आस-पास पर्याप्त आवासीय क्षेत्रों का विकास होना चाहिए ।
3.3.2. असम राज्य में एसटीपी की स्थापना करने के लिए सरकार द्वारा निजी
क्षेत्र को उत्साहित किया जाना चाहिए ।
3.3.3. आवासीय क्षेत्रों में आईटी उद्योगों की स्थापना करने के लिए
सरकार को स्वीकृति देनी चाहिए ।
3.3.4. एक उपयुक्त स्थान पर पूर्णतः विकसित एकीकृत अवसंरचनात्मक
सुविधाओं के साथ सरकार को एक इलेक्ट्रॉनिक उप-नगरीय कस्बे की स्थापना
करने का प्रयास करना चाहिए । सेवाओं के समान ही इस इलेक्ट्रॉनिक नगर का
उपयोग केवल सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए होना चाहिए । इस प्रकार
के अवसंरचना विकास में राज्य सरकार द्वारा निजी क्षेत्र को भाग लेने के
लिए उत्साहित करना होगा ।
3.3.5. सरकार को सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ़ इंडिया, सॉफ्टवेयर
उद्योग के विकास के लिए गुंछित एजेंसी तथा संस्थानों जैसे विदेश संचार
निगम (विएसएनएल), इलेक्ट्रॉनिकी विभाग, दूरसंचार विभाग, राष्ट्रीय
सूचनात्मक केंद्र, और इसी प्रकार के कुछ अन्य भारत सरकार के संस्थानों
को असम राज्य में सूचना संबंधों को विस्तृत करने के लिए सामंजस्य बैठाना
होगा और संबंध बनाने होंगे । इन एजेंसियों को गेट-वे तथा भू-केंद्रों
को स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और जब भी आवश्यक
हो प्राथ्मिकता के आधार पर सरकार द्वारा भूमि / भवन / स्थान और अन्य
सुविधाएँ उपलब्ध करवाने की कोशिश करनी चाहिए ।
3.3.6. राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को जैसे ISO:9000 आदि
अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाण की स्थिति को पाने के उद्देश्य को
स्थिर करने के लिए तथा अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा इस प्रकार की एक
संस्था या इसकी एक शाखा गुवाहाटी में स्थापित करने के लिए, जो
प्राधिकारिक रुप से आवश्यकता पड़ने पर इस प्रकार के प्रमाणीकरण जारी कर
सके, सॉफ्टवेयर अभियांत्रिकी संस्थान (एसईआई) प्रमाणीकरण पर ज़ोर डालती
हैं ।
3.3.7. असम में 100% निर्यातोन्मुखी एककों (ईओयू) के विकास के लिए 100%
निर्यातोन्मुखी योजना के अंतर्गत आवश्यक स्पष्टीकरण और स्वीकृति प्रदान
करने के लिए भारत सरकार को गुवाहाटी में एक अधिकारी को मनोनीत करने की
प्रार्थना करनी होगी ।
3.3.8. राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग राज्य के दूरसंचार नेटवर्क
के विकास में सहायक हैं जिसके लिए सरकार तथा इसकी एजेंसियाँ दूरसंचार
विभाग के साथ स्थिरता से संबंध तथा सामंजस्य बनाए रखता है और दूरसंचार
नेटवर्को की क्रमोन्नति तथा शक्तिकरण के लिए समयबद्ध कार्य योजनाओं को
लाता हैं । प्रभावी क्षेत्रों और स्थितियों में दूरसंचार संयोजन के लिए
अल्पकालीन उपाय के रुप में असम सरकार की विकास एजेंसियों अर्थात असम
औद्योगिक विकास निगम लि., असम लघुउद्योग विकास निगम लि., असम
इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम लि. तथा असम औद्योगिक अवसंरचनात्मक विकास निगम
लि., को निर्धारित खंड बनाना होगा । यह इस बात को स्थिर करेगा कि वो
उद्यमी जो सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग स्थापित करने के लिए आते हैं,
प्रार्थना करने पर तुरंत दूरसंचार सुविधाओं की स्वीकृति दी जा सकती हैं
।
3.3.9. सरकार द्वारा राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग स्थापित करने
तथा विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता के प्रबंध करने का प्रयास करना
चाहिए । सरकार को प्राथ्मिकता के आधार पर एककों के लिए वित्त प्राप्त
करने के लिए एक उपयुक्त प्रक्रिया विकसित करने के लिए बैंक और वित्तीय
संस्थानों के साथ बातचीत प्रारंभ करनी होगी । आईटी क्षेत्र को सहायता
उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार को एआईडीसी के साथ मिलकर ’संकटकालीन
पूँजी ’ के रुप में पूँजी का निकाय तैयार करना होगा ।
4. लक्षण तथा योग्यता:
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’सूचना प्रौद्योगिकी ’ सूचना प्रौद्योगिकी तथा दूर संचारों को सम्मिलित
करता हैं ।
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सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग आईटी हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर को सम्मिलित
करता हैं; आईटी सॉफ्टवेयर उद्योग, आईटी सॉफ्टवेयर, आईटी सेवाएँ एवं आईटी
समर्थन्कारी सेवाएँ सम्मिलित करता हैं; परंतु इस क्षेत्र में प्रशिक्षण
संस्थान गिनती में नहीं आते हैं ।
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सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना से तात्पर्य है - केंद्रीय सरकार, राज्य
सरकार, किसी फ़र्म, किसी निर्माता द्वारा निर्मित भौतिक अवसंरचना और किसी
आईटी उद्योग को इसके अपने प्रयोग के लिए विक्रय या किसी आईटी उद्योग
द्वारा अपने उपयोग के लिए निर्मित अवसंरचना ।
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नई इकाई से तात्पर्य है - जब से नीति की घोषणा हुई उस तारीख से या उसके
बाद से ही किसी आईटी इकाई द्वारा प्रारंभ वाणिज्यिक उत्पादन ।
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स्थाई इकाई से तात्पर्य है - जब से नीति की घोषणा हुई उस तारीख से किसी
भी समयावधि से एक आईटी इकाई जो वाणिज्यिक उत्पादन ।
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100% निर्यातोन्मुखी इकाई से तात्पर्य आईटी की एक इकाई से है जो समय -
समय पर भारत सरकार द्वारा इसकी संपूर्ण मूल्य वृद्धि वस्तुओं के
निर्यात में दी जाने वाली ढील में सहायक होता हैं ।
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स्थिर परिसंपति से तात्पर्य और इसके अंतर्गत भूमि की क़ीमत और यंत्र व
संयंत्र एवं इसकी नियुक्ति मूल्य, पूर्व-प्रभावी पूँजीगत खर्चे, बिजली
के तथा कुछ अन्य साधन जो उद्यम प्रक्रिया से प्रत्यक्ष रुप से संबंधित
हैं ।
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किसी आईटी इकाई के विस्तारण से तात्पर्य स्थाई इकाई के पूँजी निवेश का
कम-से-कम 25% अतिरिक्त स्थावर पूँजी निवेश में बढोत्तरी । गणना के
उद्देश्य से स्थाई इकाई की भूमि, भवन और यंत्र व संयंत्र पर किए गए
संपूर्ण पूँजी निवेश सकल मूल्य के सोच-विचार के लिए लेना चाहिए । स्थाई
रुप से अधिकारों पर नियुक्ति की क्षमता में कम-से-कम 25% की वृद्धि के
साथ-साथ अतिरिक्त नियोजन में 10% की दर से विस्तारण भी फलित होना चाहिए
।
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आधुनिकरण से तात्पर्य है - उत्पादन लागत में कटौती के निश्चित लाभ के
साथ सम्मिलित नई / बेहतरीन तकनीक समेत एक औद्योगिक इकाई द्वारा पृथक
रुप से अभिनिर्धारणीय किए गए निवेश स्थिर संपत्तियों में उपलब्ध
अतिरिक्त निवेश सकल स्थिर पूँजी 25% से कम नहीं होना चाहिए ।
4.1. योग्यता:
आईटी उद्योग के रुप में पारिभाषित सभी उद्योग निर्देशित प्रेरकों के
योग्य होना चाहिए । विस्तार / आधुनिकीकरण की ओर जाती इकाइयों को स्थाई
इकाई के विस्तार / आधुनिकीरण के बाद निर्मित बढी हुई क्षमता को प्रेरित
करने के योग्य होना होगा ।
4.2. आईटी के क्षेत्र में निवेश के प्रसार के लिए प्रोत्साहन :
चल रहे विस्तार / आधुनिकीरण में नई इकाइयों के साथ-साथ स्थाई इकाइयों
को प्रोत्साहन उपलब्ध करवाना होगा । प्रोत्साहनों का पैकेज निम्नलिखित
होना चहिए:-
4.2.1 विक्रय कर में छुट :
सभी नई तथा स्थाई इकाइयों के चालू ठोस विस्तार / क्रमोन्नति /
चित्रांकन को निर्मित उत्पादों, मूल्य वृद्ध उत्पादों तथा पूँजीगत
वस्तुओं एवं कच्चे माल के क्रय को अनुवर्णित अवधि के लिए विक्रय कर से
मुक्ति प्रदान किया जाना चाहिए । यद्यपि, पूँजीगत वस्तुओं के क्रय को
विक्रय कर से मुक्ति दी जानी चाहिए, यदि इस प्रकार की सामग्रियों को
स्थानीय रुप से खरीद गया हो:-
क- नई इकाइयाँ - 10 वर्ष
ख- स्थाई इकाइयाँ - 10 वर्ष
(चालू विस्तार / उन्नयन / विविधिकरण)
(वित्त (कराधान) विभाग द्वारा इस संबंध में एक पृथक टिप्पण जारी किया
जाएगा ।)
यद्यपि, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा 5 वर्षों बाद विक्रय कर में
छूट को उनके विस्तार करने या न करने पर पुनर्विचार करना होगा ।
4.2.2. ऊर्जा सब्सिडी:
वाणिज्यिक उत्पादन में आने के दिन से 5 वर्षों की अवधि के लिए ऊर्जा
सब्सिडी मुहैया करवानी होगी । सब्सिडी की रकम की एक ऊपरी सीमा 50%
मानकर 5.00 लाख रुपये प्रतिवर्ष होना चाहिए ।
4.2.3 उत्पादनकारी सैट पर सब्सिडी:
गैर-परंपरागत उर्जा उत्पादन सैट सहित बंधक उत्पादनकारी सैट पर
उत्पादनकारी सैट के मूल्य की एक उपरी सीमा 50% मानकर 10 लाख रुपये
सब्सिडी प्रति औद्योगिक इकाई होनी चाहिए।
4.2.4. राजकीय पूँजी निवेश सब्सिडी:
भूमि, भवन, यंत्र तथा संयंत्र इत्यादि पर राजकीय पूँजी निवेश पर सब्सिडी
का 30% पूजी निवेश योजना के अंतर्गत एक आईटी इकाई को 10 लाख रुपये ऊपरी
सीमा मानकर उपलब्ध करवाया जाना चाहिए । 100% ईओयू और महिलाओं द्वारा
चालित एस.सी. एवं एस.टी. उद्यमों की ऊपरी सीमा 15 लाख रुपये की सब्सिडी
होनी चाहिए ।
4.2.5. अवसंरचना पर सब्सिडी:
एस्टीपीआई को भुगतान किए जाने वाले निकाले गए किराए पर 50% सब्सिडी पर
उत्पादनकारी प्रक्रिया में आने के दिन से तीन वर्षों की अवधि के लिए
उपलब्ध करवाई जानी चाहिए ।
4.2.6. तीव्र लाइन / पट्टा लाइन मिलाप पर सब्सिडी:
एस्टीपीआई या वीएसएनएल को भुगतान किए गए तीव्र लाइन / पट्टा लाइन मिलाप
पर 30% सब्सिडी की ऊपरी सीमा मानकर 5 लाख प्रतिवर्ष वाणिज्यिक प्रक्रिया
के दिन से 3 वर्षों की एक अवधि के लिए उपलब्ध करवाई जानी चाहिए ।
4.2.7. श्रमजीवी विकास पर सब्सिडी:
श्रमजीवी विकास पर सब्सिडी प्रशिक्षण / तकनीकी क्रमोन्नति / कुशल
क्रमोन्नति के संबंध में स्थानीय लोगों की मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण
संगठन / संस्थान निम्नलिखित ऊपरी सीमा माना गया:
स्थिर पूँजी में निवेश कुल सीमांत
20 लाख रु. तक 1.5 लाख रु.
20 लाख रु. से 25 लाख रु. 2 लाख रु.
25 लाख रु. से 50 लाख रु. 3 लाख रु.
50 लाख रु. से 100 लाख रु. 5 लाख रु.
100 लाख रु. से ऊपर और 1 करोड़ से ऊपर 10 लाख रु.
केवल इकाई के वाणिज्यिक प्रक्रिया के दिन से 5 वर्षों की एक अवधि के
लिए उपरोक्त रक़म उपलब्ध होनी चाहिए ।
4.2.8. गुणवत्ता प्रमाणन पर सब्सिडी:
मूल्य का 50% ISO:9000, सॉफ्टवेयर अभियांत्रिकी संस्थान (एसईआई)
प्रमाणन और गुणवत्ता बीमा संस्थान (क्यूएआई) प्रमाणन प्राप्ति के लिए
एक ऊपरी सीमा 2 लाख रु. को आर्थिक सहायता मानना चाहिए ।
4.3. विशाल परियोजनाओं के लिए सरकार को घटना पर पहले ही उपलब्ध सुविधाओं
को विशेष प्रोत्साहन समझना होगा । एक विशाल परियोजना की परिभाषा 100
करोड़ रु. और अधिक किया गया एक निवेश हो सकता है ।
5.0. आईटी समर्थकारी उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन:
आईटी उद्योगों को प्रदत्त सुविधाओं के संबंध में निम्नलिखित सुविधाएँ
आईटी समर्थकारी सेवाओं के लिए दी जानी चाहिए ।
5.1. वाणिज्यिक उत्पादन में जाने के दिन से 5 वर्षों की एक अवधि के लिए
ऊर्जा सब्सिडी मिलना चाहिए । सब्सिडी की रक़म को 60% की ऊपरी सीमा मानकर
10 लाख रु. प्रतिवर्ष होनी चाहिए ।
5.2. गैर-प्रम्परागत ऊर्जा उत्पादन सैट सहित बंधक उत्पादनकारी सैट पर
उत्पादनकारी सैट के मूल्य की एक ऊपरी सीमा 60% मानकर 15 लाख रु. सब्सिडी
प्रति औद्योगिक इकाई होनी चाहिए ।
5.3. भूमि, भवन, यंत्र तथा संयंत्र इत्यादि पर राजकीय पूँजी निवेश पर
सब्सिडी का 40% पूँजी निवेश योजना के अंतर्गत एक आईटी इकाई को 15 लाख
रु. ऊपरी सीमा मानकर उपलब्ध करवाया जाना चाहिए ।
5.4. एसटीपीआई को भुगतान किए जाने वाले निकाले गए किराए पर 60% सब्सिडी
पर उत्पादन-कारी प्रक्रिया में आने के दिन से 3 वर्षों की अवधि के लिए
एक ऊपरी सीमा 5 लाख रु. प्रतिवर्ष दी जानी चाहिए ।
5.5. एसटीपीआई या वीएसएनएल को भुगतान किए गए तीव्र लाइन / पट्टा लाइन
मिलाप पर 40% सब्सिडी को उपरी सीमा मानकर 10 लाख रु. प्रतिवर्ष
वाणिज्यिक प्रक्रिया के दिन से 3 वर्षों की एक अवधि के लिए उपलब्ध
करवाई जानी चाहिए ।
विशेष रुप से आईटी समर्थकारी क्षेत्र के लिए पात्रता के मानदंड इस
प्रकार से है:-
अ) इकाई द्वारा कम-से-कम 100 स्थानीय लोगों को रोज़गार प्रदान किया जाना
चाहिए ।
ब) रोज़गार कम-से-कम 3 वर्षों की अवधिके लिए प्रदान किया जाना चाहिए ।
स) इकाई द्वारा प्रत्येक कर्मचारी को कम-से-कम 4500 रु. प्रति माह के
न्यूनतम वेतन प्रदान किया जाना चाहिए ।
6.0. निम्नलिखित नियंत्रणों के संबंधित उपबंधों से उद्योग को मुक्त
करवाने के लिए सरकार को सभी आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता हैं:
अ) कारखाना अधिनियम, 1948
आ) नियोजन विनिमय (रिक्तियों की अनिवार्य अधिसूचना) अधिनियम, 1959
इ) वेतनों का भुगतान अधिनियम, 1936
ई) न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948
उ) बँधुआ मज़दूरी (नियंत्रण व उन्मूलन) अधिनियम, 1970
ऊ) कारीगर मुआवज़ा अधिनियम, 1923
ए) दुकान एवं संस्थापन अधिनियम, 1971
ऐ) कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948
ओ) गुवाहाटी महानगरीय प्राधिकरण अधिनियम, 1985 के अंतर्गत मंडलीकरण
नियंत्रण राजपत्र में 24/12/1986 को अंचलीकरण के लिए अधिसूचना संदर्भ
संख्या, टीसीपी.79/83/56, दि. 25/09/1986) ।
7.0. कार्यान्वित एजेंसी:
राज्य सरकार की ओर से असम की सूचना प्रौद्योगिकी नीति के क्रियान्वयन
के लिए उद्योग एवं वाणिज्य विभाग गुंछित एजेंसी होने वाली है । कुछ समय
तक अधिसूचना के दिनांक से ये नीति प्रभाव में आ जाएगी, तब सरकार इसे
सटीक और उचित मान सकेगी ।
8.0. पात्रता प्रमाणपत्र:
8.1. पात्रता प्रमाणपत्र वह प्रमाणपत्र है, जिसे इस नीति के
क्रियान्वयन के उद्देश्य से असम इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम लि. में
उद्योग सहायक संकुल द्वारा जारी किया जाना चाहिए ।
8.2. केवल दृढ़ सामर्थ्य के द्वारा कि इकाई ने अपने भाग को योजना के गुणों
से परिपूर्ण कर लिया है मानकर किसी भी प्रोत्साहन के लिए दावा या
अधिकार की बात करना इस नीति के अंतर्गत नहीं हैं ।
8.3. योजना के अंतर्गत प्रोत्साहनो का दावा नहीं किया जा सकता, अन्यथा
क्रियान्वयन एजेंसी के द्वारा नीति के अंतर्गत अंतिम पात्रता
प्रमाणपत्र जारी किया जाता है और इकाई को पात्रता प्रमाणपत्र के नियमों
/ परिस्थितियों को स्वीकार करना होता हैं ।
8.4. एजेंसी के क्रियान्वयन के विषय में सरकार द्वारा समय-समय पर इस
दिशा में अंतिम तथा बंधन से संबंधित निर्णय जारी किया जाना चाहिए ।
9.0. आवेदन की प्रक्रियाएँ:
पात्रता प्रमाणपत्र की प्रवाही के लिए अलग दिशानिर्देश तथा प्रोत्साहनों
के दावों के लिए अनुरोध जारी किया जाएगा ।
10.0. भुगतान के लिए प्राथमिकता:
क्रियान्वायन एजेंसी द्वारा प्रोत्साहनों का भुगतान स्वीकृत दावों के
कालक्रम के अनुसार क्रम अनुरुपता के साथ होना चाहिए । यद्यपि, 100%
निर्यातोन्मुखी इकाइयों को प्राथमिकता दीजानी चाहिए ।
11.0. भाषांतरण:
असम सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य का भाषांतरण के प्रतिइस नीति के
संकल्प / प्रोत्साहन का निर्माण अंतिम होना चाहिए । इस नीति में दी
जानेवाली कोई भी प्रोत्साहन / सब्सिडी की निकासी सहित प्रोत्साहनों को
बढ़ाने या घटाने अथवा नए दिशानिर्देश तय करके किसी भी प्रावधान में
अनुमोदन का अधिकार सुरक्षित रखता हैं ।
12.0. नीति का क्रियान्वयन और अनुश्रवण:
12.1.सूचना प्रौद्योगिकी संकुल (आईटीसी):
आईटी उद्योग को विभिन्न सूचना एवं सुविधाएँ प्रदान करने के उद्देश से
तथा संपूर्ण सेवाओं के उचित विवरण के लिए असम इलेक्ट्रॉनिकी विकास निगम
लि. (असम सरकार का एक उपक्रम) में सूचना प्रौद्योगिकी संकुल (आईटीसी)
नामक एक अलग संकुल का निर्माण किया जाना चहिए । आईटीसी का प्रथम उद्देश
उद्यमियों को पर्याप्त सूचना प्रदान करना, परियोजनाओं को पहचाना व इसका
क्रियान्वयन और राज्य में तथा बाहर आईटी के क्षेत्र में ही सादृश्य
संस्था / संस्थान के साथ मेल भी बनाए रखना चाहिए ।
12.2. आईटीसी के कार्य:
सभी प्रशासनिक विभागों को सूचना प्रौद्योगिकी नीति के क्रियान्वयन से
संबंधित आईटीसी के सभी मुद्दों का आधार लेना चाहिए तथा इस संबंध में
उठाए गए सभी क़दमों से आईटीसी जो सूचना रखना चानिए । आईटीसी निम्नलिखित
कार्य पूरा करेगा :
अ) असम की सूचना प्रौद्योगिकी नीति, 2000 के पर्याप्त विज्ञापन को
स्थिर करने के साथ-साथ उद्यमियों को प्रोत्साहनों से लाभन्वित होने में
परी सहायता देना ।
आ) दूरदर्शी उद्यमियों की पहचान, उद्यमियों के मार्गदर्शन तथा
प्रोत्साहन के लिए एक डेटा बैंक का निर्माण और निवेश के विभिन्न
श्रेणियों जीने योग्य परियोजना का पार्श्व चित्र भी बनाना ।
इ) नीति के अंतर्गत पात्रता प्रमाणपत्र के आवेदनों का सूचीकरण तथा
प्रवाही ।
ई) आईटी नीति के क्रियान्वयन के लिए संबद्ध एजेंसियों / प्रशासकीय
विभागों के साथ समन्वयन बनाना ।
उ) सभी प्रोत्साहनों तथा उसके आज्ञा की प्रवाही के लिए उचित तथा
प्रभावशाली क्रियान्वयन ।
ऊ) नीति के क्रियान्वयन के साथ संबद्ध किसी भी विषय के अंतर्गत सभी
प्रासंगिक मुद्दों के आधार बनाकर सरकार का या समितिका निर्माण ।
ए) किसी भी अन्य विषय से संपर्क रखने के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर
प्रतिपादन ।
12.3. पात्रता प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रियाएँ:
पात्रता प्रमाणपत्र के वितारणर्थ आवेदन को असम एलेक्ट्रॉनिकी विकास
निगम लि. के आगे पात्रता प्रमाणपत्र के प्रत्यक्ष वितरण के लिए रखना
चाहिए । सरकार एक समिति की रचना के प्रस्तावों पर श्क्तियों की स्वीकृति
के साथ प्रतिपादित एक पृथक आधिसूचना जारी करेगी ।
12.4. सूचना प्रौद्योगिकी कार्य शक्ति:
नीचे दिए गए संदर्भों के अनुसार, नीति के क्रियान्वन का निरीक्षण
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य की एक सूचना प्रौद्योगिकी कार्य
शक्ति का गठन किया जाना चाहिए:
असम के मुख्यमंत्री, - सभापति
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री, असम, - उप-सभापति
असम के मुख्य सचिव - सदस्य
आयुक्त व सचिव / असम सरकार के सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग - सदस्य
आयुक्त व सचिव / असम सरकार के सभिव, शिक्षा विभाग
आयुक्त व सचिव / असम सरकार के सभिव, वित्त विभाग
आयुक्त व सचिव / असम सरकार के सभिव, विज्ञान एवं प्रैद्योगिकी विभाग
आयुक्त व सचिव / असम सरकार के सभिव, योजना एवं विकास विभाग
आईटी उद्योग से चार प्रतिनिधि सरकार द्वारा नामांकित होने चाहिए
निदेशक, आईआईटी गुवाहाटी
मुख्य महाप्रबंधक, डीओटी, असम चक
निदेशक, एसटीपी, गुवाहाटी
उद्योग एवं वाणिज्य के निदेशक, असम
प्रबंध निदेशक एअईडीसी लि.
महाप्रबंधक, एसाअईडीबीआई
सभापति, एनईडीएफाअई
महाप्रबंधक, एईडीसी लि.
सभापति / उप-सभापति समिति के लिए कम-से-कम पाँच विशेषज्ञों को सहयोजित
कर सकती हैं, सदस्य सचिव
समिति के कार्य:
असम की सूचना प्रौद्योगिकी नीति, 2000 के क्रियान्वयन का निरीक्षण और
इस संबंध में समय-समय पर संबंधित विभागों को सुधार के लिए सुझाव पारित
करना ।
राज्य के लिए नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार को किसी
भी उप-समिति या कोई भी अनुसंधान दल के गठन की सलाह देना ।
नीति के क्रियान्वयन के दौरान सामना किए गए समस्याओं का अध्ययन करना तथा
इन समस्याओं के समाधान हेतु आवश्यक उपाय सुझाना ।
आवश्यक उपाय सुझाने हेतु अंतःविभागीय समन्वय समस्याओं की चर्चा करना ।
आईटी उद्योग के लिए अवसंरचना के विकास का निरीक्षण और निगरानी करना ।
सभापति की अनुज्ञा से जब भी ज़रुरत पड़े समिति वर्ष में कम-से-कम तीन बार
मिल सकती हैं।
12.5. अंतःविभागीय सूचना प्रौद्योगिकी समिति:
राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी के विकास को अढावा देने के लिए
अंतःविभागीय कार्यकलापों तथा शिक्षा, उद्योग इत्यादि जैसे क्षेत्रों
में विकास पर निगरानी रखना । एक अंतःविभागीय सूचना प्रौद्योगिकी समिति
(आईडीआईटीसी) का गठन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में निम्न प्रकार से होना
चाहिए:-
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मुख्य सचिव, असम सरकार, सभापति
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आयुक्त व सचिव / असम सरकार का सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, सदस्य,
सचिव
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आयुक्त व सचिव / असम सरकार का सचिव, वित्त विभाग, सदस्य
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आयुक्त व सचिव / असम सरकार का सचिव, योजना एवं विकास विभाग, सदस्य
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आयुक्त व सचिव / असम सरकार का सचिव, शिक्षा विभाग
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आयुक्त व सचिव / असम सरकार का सचिव, राजस्व विभाग
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आयुक्त व सचिव / असम सरकार का सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
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प्रबंध निदेशक, एआईडीसी लि.
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प्रबंध निदेशक, एईडीसी लि.
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उद्योग एवं वाणिज्य निदेशक
सभापति / समिति के लिए कम-से-कम दो विशेषज्ञों को सदस्यों के रुप में
सहयोजित कर सकती हैं ।
समिति के कार्य निम्न रुप से होने चाहिए:
असम की सूचना प्रौद्योगिकी नीति, 2000 के क्रियान्वयन का निरीक्षण और
समय-समय पर सूचना प्रौद्योगिकी कार्य शक्ति के लिए सुझाव प्रसतुत करना
।
राज्य में आईटी उद्योगों के विकास को सुझाना एवं नीति के क्रियान्वयन
के विभिन्न लक्षणों की निगरानी करना ।
नीति के क्रियन्वयन के दौरान सामन किए गए समस्याओं का अध्ययन करना तथा
आवश्यक उपाय सुझाना ।
आईटी के संबंध में विभिन्न सरकारी विभागों के विषयों में ध्यान देना ।
सभापति की अनुज्ञा से समिति वर्ष में तीन माह पर एक बार मिल सकती हैं ।
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